Saturday, 17 October 2009

शबरी-२

ॐ शिवे भगवे भगे भगे भगम , क्षोभय- क्षोभय, मोही -मोही , छादय-छादय , क्लेदय-क्लेदय क्लीन शरीरे ॐ फट स्वाहा।

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीन सर्व्पुरुष सर्वस्त्री ह्रदय हारिणी माम्वाश्यम कुरु वशत ह्रीं श्रीं नमः।

ॐ चंडी महाचंडी दुरिताप हारिणी ,सर्व शत्रु विनाशिनी ,खिलनी मोहनी , स्ताम्भ्नी , उच्चातिनी , त्रैलोक्य स्वामिनी, माया मोहम बंधिनी, राजा- प्रजा वाशीकरनी , एं क्लीन ह्रीं हलोम स्वः ॐ फट स्वाहा। 21

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